बारिश के दर्द को सुन पाओगी?

सुबह से बादल गरजता रहा,
रात भर रात रोती रही.
मेरा जनाज़ा उठता रहा,
उसकी बारात होती रही.
वो नहीं मिला मुझे तो क्या हुआ,
एक बरसात ही थी जो साथ होती रही.
क्या मेरे साथ आओगी,
बारिश के दर्द को सुन पाओगी?

जो ख्वाब था वो खो गया

जो होंठ मिले
तो चिपक से गए
फिर
बादल गरजे
बिजली चमकी
लहरें उछली
पलके झपकीं
पानी बरसा
और हवा चली.
जो ख्वाब था वो खो गया.

high tide का तीखापन


Dark Clouds.
और हलकी हलकी बारिश.
तेज हवा में उड़ते तुम्हारे sea-green earrings.
दूर क्षितिज पर जलता RBS का signboard.
और पास, तुम्हारी साँसों की गहमागहमी,
चढ़ी हुई भंवें,
आँखों का काजल,
नाक की नथनी,
होठों का आकर्षण,
लहराता stole,
पीला कुरता,
नीली जींस,
गीली कोल्हापुरी.
और रिश्ते की गहराई को मापने के लिए, चुम्बन का तीखापन.
High tide में तुम मेरे इतने करीब आ जाती हो.
तुम मुझसे इतनी दूर क्यूं हो?
*रिश्ते की गहराई को मापने के लिए, चुम्बन का तीखापन – ये पंक्ति धरमवीर भारती कृत गुनाहों का देवता से ली गयी है

Holding Hands

“Which is your favourite place in Bombay,” she asked, on a rainy evening as we walked on the Marine Drive.
“My room in the one room kitchen I live in,” I replied.
“Why?” she asked.
“Because the best things that I do happen there,” I explained.
“So lets go there,” she said, holding my hand for the first time.
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

A funny feeling

Dark clouds.
The red gulmohar in all its glory.
A gust of wind.
Her umbrella blows away.
Getting wet in the rain.
Walking on the marine drive.
Not holding hands.
A funny feeling.
Am I back to where I belong?